सिसायी उठापटक के बीच कांग्रेस ने भाजपा को जवाब देने की तैयारी की है। पहला कदम होगा, बेंगलुरू में रखे गए सिंधिया समर्थक विधायक जब तक पेश नहीं होते, तब तक कांग्रेस सदन में फ्लोर टेस्ट के लिए नहीं जाएगी। मुख्यमंत्री कमलनाथ शुक्रवार को राज्यपाल लालजी टंडन से मिलने वाले हैं।
बताया जा रहा है, वे राज्यपाल के सामने विधायकों को वापस लाने की बात रख सकते हैं। विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका को लेकर भी कांग्रेस आश्वस्त है। इस्तीफा स्वीकार करने में समय लगता है तो वह कांग्रेस के पक्ष में होगा। बहुमत में सरकार बनी रहेगी। बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष हंगामा करता है तो स्पीकर सख्त फैसले लेंगे। कांग्रेस बेंगलुरू से विधायकों के आने पर उनके परिजन और क्षेत्र के लोगों को सामने रखेगी, ताकि वे सोचने पर मजबूर हो जाएं कि दोबारा चुनाव में जाते हैं तो क्या दिक्कत आ सकती है। कांग्रेस को लगता है, भाजपा सिंधिया समर्थक विधायकों को सदन से गैर हाजिर रखना चाहती है। बहरहाल, यदि सिंधिया खेमे के विधायक नहीं आते हैं और इस्तीफा मान्य नहीं होता है और विधायक नहीं आते तो सदन की कार्रवाई चलती रहेगी।
12 बागी विधायक थे संपर्क में, शुक्ला पर भी नजर
सूत्रों के अनुसार, दो दिन पहले बेंगलुरू के 10-12 विधायक कांग्रेस के संपर्क में थे, बुधवार को यह टूट गया। गुरुवार को फिर वे संपर्क में आए हैं। जयपुर से इंदौर लौटे विधायक संजय शुक्ला से भी हर घंटे बात की जा रही है।